IJ
IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(6):709-712

टोडारायसिंह की स्थापत्य कला एवं मूर्तिकला का कलात्मक अध्ययन

Author Name: रामदेव मीणा;   डॉ. शालिनी भारती;  

1. शोधार्थी, चित्रकला विभाग, राजकीय कला महाविद्यालय, कोटा, कोटा विश्वविद्यालय, राजस्थान, भारत

2. रिसर्च सुपरवाइजर, चित्रकला विभाग, राजकीय कला महाविद्यालय, कोटा, कोटा विश्वविद्यालय, राजस्थान, भारत

Paper Type: research paper
Article Information
Paper Received on: 2025-10-12
Paper Accepted on: 2025-11-29
Paper Published on: 2025-12-31
Abstract:

राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत में टोडारायसिंह (जिला टोंक) एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं कलात्मक केंद्र के रूप में स्थापित है। यहाँ की स्थापत्य कला एवं मूर्तिकला न केवल क्षेत्रीय शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है, बल्कि भारतीय शिल्पशास्त्र, धार्मिक आस्थाओं तथा सामाजिक संरचना के विविध आयामों को भी अभिव्यक्त करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में टोडारायसिंह के मंदिरों, बावड़ियों, दुर्गों एवं अन्य स्थापत्य संरचनाओं का कलात्मक, शैलीगत एवं प्रतीकात्मक विश्लेषण किया गया है। साथ ही मूर्तिकला के आइकनोग्राफिक पक्ष, शिल्प तकनीक, सामग्री तथा सांस्कृतिक महत्व का भी अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि टोडारायसिंह की कला परंपरा भारतीय कला इतिहास में विशिष्ट स्थान रखती है।

Keywords:

टोडारायसिंह, स्थापत्य कला, मूर्तिकला, नागर शैली, बावड़ी, राजस्थान, शिल्पशास्त्र

How to Cite this Article:

रामदेव मीणा,डॉ. शालिनी भारती. टोडारायसिंह की स्थापत्य कला एवं मूर्तिकला का कलात्मक अध्ययन. International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary. 2025: 4(6):709-712


Download PDF