International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(4):359-361
व्यवसायिक संतुष्टि और शिक्षण प्रभावशीलता के मध्य सम्बन्ध: माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के सन्दर्भ में एक अध्ययन
Author Name: कपिल देव; डा॰ कौशल शर्मा;
Abstract
शिक्षा को प्राचीन से लेकर वर्तमान तक ही जीवन का सबसे उत्तम अंग माना जाता है। और कभी भी विद्यार्थी के जीवन में आध्यात्मिक स्तर को सम्पूर्ण जीवन की नींव माना जाता है जबकि इस स्तर के ऊपर ही सम्पूर्ण जीवन टिका हुआ होता है। इसलिए माध्यमिक स्तर के शिक्षकों से भी अलग महत्व ही दिया जाता है। जबकि क्योंकि सम्पूर्ण जीवन के शिक्षकों में माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को सम्पूर्ण जीवन का आधार माना जाता है।
इस स्तर के शिक्षकों की व्यवसायिक संतुष्टि, उनकी शिक्षण प्रभावशीलता का किसी भी विद्यार्थी के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए शोधार्थी ने अपने शोधपत्र के व्यवसायिक संतुष्टि और शिक्षण प्रभावशीलता के मध्य संबंध का विश्लेषण अध्ययन किया है। शोधार्थी ने अपने शोध को माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को केन्द्रित किया है।
वर्तमान शिक्षा प्रणाली के शिक्षकों की भूमिका को केवल ज्ञान के संप्रेषण तक ही सीमित नहीं माना जाता, बल्कि शिक्षकों को विद्याथ्रियों के जीवन के समग्र विकास के लिए एक प्रकार की प्रेरक शक्ति माना जाता है शिक्षक की व्यवसायिक संतुष्टि का स्तर शिक्षकों की शिक्षण की गुणवत्ता और शिक्षण प्रभावशीलता को गहराई से प्रभावित करता है।
शोधार्थी के अपने शोध-पत्र के अन्दर यह पता लगाने का प्रयास किया है कि क्या शिक्षक की नौकरी से संतुष्टि उसकी शिक्षण प्रभावशीलता को प्रभावित करती है। और यदि हाँ, तो किस हद तक प्रभावित कर सकता है।
शोधार्थी द्वारा प्रस्तुत शोध-पत्र में व्यवसायिक संतुष्टि के उपघटक के रूप में कार्य का वातावरण, वेतन, प्रशासनिक सहयोग, सहकर्मी सम्बन्ध, पदौन्नति के अवसर और कार्य जीवन संतुलन आदि का अध्ययन किया गया है। इसी के साथ शिक्षण प्रभावशीलता को प्रभावित करने वाले कारकों के रूप में शिक्षण विधियों, छात्र सहभागिता, कक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन दक्षता एवं सीखने के परिणामों को आधार बनाकर अध्ययन किया गया है।
Keywords
शिक्षक, शिक्षण प्रभावशीलता, व्यवसायिक संतुष्टि, माध्यमिक शिक्षा, सर्वांगीण विकास