International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(2):509-516
सुमित्रानंदन पंत का काव्यचिंतन: मूल्य और महत्व
Author Name: प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी;
Abstract
इस धारा-सा ही जग क्रम
शहस्वात इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
नौकाविहार की ये पंक्तियां सुमित्रानन्दन पंत की काव्य साधना, काव्य मूल्य एवं चिन्तन पक्ष के शिल्प को प्रकट करती हैं, जो पंत जी की रचनायात्रा में आद्यन्त विद्यमान हैं। पंत जी अन्वेषी, भारतीय सांस्कृतिक जागरण की निरतर प्रवाहमान, परिवर्तनशील गतिशील परिस्थितियों में क्रमिक विकासमान स्वभाव के जीवनधर्मी,मूल्यधर्मी एवं आस्थाधर्मी कवि, विचारक हैं। उनके काव्य मूल्य एवं काव्यचिन्तन में जहाँ एक ओर परम्परा से टकराहट है, वहीं परम्पराओं से टकराकर उसे नये रूप में सृजित कर अनेक जीवनधर्मी मूल्यों से जुड़ने की गतिशील साधना है।
Keywords
अन्वेषी,काव्य-मूल्य, जीवनधर्मी,काव्य-चिन्तन, संवेदनशील, प्रकृति निरीक्षण, सौन्दर्यबोध, रवीन्द्र काव्य, जागरण, आत्माभिव्यक्ति।