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IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):210-217

ग्रामीण संस्कृति एवं जातिगत कार्यशैली में परिवर्तन: परंपरागत एवं आधुनिक प्रतिमानों का तुलनात्मक अध्ययन

Author Name: डॉ. गुन्जन त्रिपाठी;  

1. सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, आदर्श कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जियापुर, बरुआ-जलांकी, टाण्डा, अम्बेडकर नगर, (डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय) अयोध्या, उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

ग्रामीण समाज में संस्कृति और जातिगत कार्यशैली ऐतिहासिक रूप से परस्पर संबद्ध रही है, जहाँ जाति के आधार पर श्रम विभाजन और पेशागत संरचना सामाजिक संगठन का प्रमुख आधार मानी जाती रही है। किंतु आधुनिकीकरण, नगरीकरण, शिक्षा के प्रसार तथा बाजार अर्थव्यवस्था के विस्तार के परिणामस्वरूप इस पारंपरिक व्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण एवं नगरीय संदर्भ में जातिगत कार्यशैली के परंपरागत तथा आधुनिक प्रतिमानों का तुलनात्मक विश्लेषण करना है। उक्त अध्ययन में ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के कुल 180 उत्तरदाताओं से सर्वेक्षण, अनुसूची एवं असंरचित साक्षात्कार के माध्यम से प्राथमिक आंकड़े संकलित किए गए हैं, जबकि द्वितीयक स्रोतों में सरकारी आंकड़ों, पुस्तकों, शोध पत्र एवं आलेखों आदि का उपयोग किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन के निष्कर्ष संकेत करते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत पेशों की निरंतरता अभी भी विद्यमान है, किंतु शिक्षा, तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता और नगरीय संपर्क के कारण पेशागत गतिशीलता बढ़ रही है। नगरीय क्षेत्रों में जातिगत बाध्यता अपेक्षाकृत कम तथा पेशागत विविधता अधिक पाई गई। इस प्रकार अध्ययन द्वारा यह स्पष्ट होता है कि परंपरा और आधुनिकता के मध्य अंतःक्रिया के परिणामस्वरूप जातिगत कार्यशैली में संरचनात्मक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन हो रहे हैं, जो ग्रामीण समाज की बदलती सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता को प्रतिबिंबित करते हैं।

Keywords

ग्रामीण संस्कृति, जातिगत कार्यशैली, पेशागत गतिशीलता, आधुनिकीकरण, ग्रामीण–नगरीय अंतर