International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):237-239
बोधिधर्मन-आत्म रक्षा कला के जनक
Author Name: डॉ. अमित चमोली; प्रो. प्रभात कुमार;
Abstract
प्राचीन कल से ही भारत अपनी प्राचीन कलाओं को लेकर आकर्षण का केंद्र रहा है जिस कारण अनेक धर्म प्रचारक, विभिन्न देशों के राजदूत का आना भारत में लगा रहा l जिससे भारत के संबंध अशोक काल के समय चीन के साथ स्थापित हुए व ज्ञान-विज्ञान से संबंधित विचारों का आदान प्रदान भी होने लगा यही कारण है कि बोध धर्म आज पूरे विश्व में विख्यात है व जापान, चीन, कॉम्बोडिया, थाईलैंड, सिंगापूर जैसे अनेक देशों में बोध धर्म अपनी जड़े जमा चुका है l धर्म के साथ साथ भारत से आत्म रक्षा कि कलाये भी विभिन देशों में प्रचारित हुई जिनमे कुंगफू चीन में, जापान में कराते, कोरिया में टाइकोंडु आदि आत्म रक्षा की कला सम्मिलित है l बोधि धर्मन के द्वारा न सिर्फ आत्म रक्षा की कला को प्रसारित किया गया बल्कि बोधि द्वारा प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा को भी चीन में प्रसारित किया गया l जिससे आज भी चीन में इस चिकित्सा शैली को अपनाया जाता है व विभिन्न शारीरिक समस्याओं के समाधान में इस चिकित्सा शैली को उपयोग में लाया जाता है l यह एक प्रशनीय विषय है कि आज भारत कि अपनी लोक कलाओं के विषय में भारतीयों को अल्प- ज्ञान है जबकि बोधि के ज्ञान की पाठशाला आज भी विश्व के विभिन्न देशों में विख्यात है l संबंधित शोध -पत्र इसी प्रश्न पर आधारित है कि भारत की अपनी मार्शल कला का ज्ञान भारत में सीमित होकर क्यू विश्व के अन्य देशों में विख्यात है जिनमे कल्लरी, कुंगफू आदि शामिल है l संबंधित शोध पत्र बोधिधर्मन पर आधारित है जिन्हे आत्म रक्षा कला के पिता के रूप में भी जाना जाता है l
Keywords
बोधिधर्मन, दारुम, शाओलिन मंदिर, भारत-चीन संबंध, भारत -जापान