International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1120-1129
अजमेर जिले में असंगठित क्षेत्र (घरेलू श्रमिक) में कार्यरत महिलाओं की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन: एक समीक्षात्मक अध्ययन
Author Name: Vijay Prakash Meena; Dr. Hemlata Mahawar;
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र अजमेर जिले के असंगठित क्षेत्र में घरेलू कार्यरत महिलाओं की सामाजिक स्थिति में हो रहे परिवर्तनों का समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। भारतीय समाज में घरेलू कार्य महिलाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जिनकी शैक्षिक योग्यता सीमित है और जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित हैं। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य घरेलू कार्यरत महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, कार्य की प्रकृति तथा रोजगार के कारण उनके जीवन में आए सामाजिक परिवर्तनों का विश्लेषण करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि घरेलू कार्य महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता एवं आत्मनिर्भरता में वृद्धि होती है। परिवार की आय में योगदान देने के कारण महिलाओं की पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी, आत्मविश्वास तथा सामाजिक पहचान में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। घर से बाहर कार्य करने के कारण उनके सामाजिक संपर्कों एवं जागरूकता का भी विस्तार होता है। हालाँकि घरेलू कार्यरत महिलाओं के समक्ष कम वेतन, रोजगार की असुरक्षा, लंबे कार्य घंटे, दोहरा कार्यभार, सामाजिक भेदभाव तथा सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी अनेक चुनौतियाँ मौजूद हैं। असंगठित क्षेत्र की प्रकृति के कारण अधिकांश महिलाओं को नियमित रोजगार, लिखित अनुबंध तथा श्रम संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पातीं। अध्ययन निष्कर्ष रूप में यह दर्शाता है कि घरेलू रोजगार महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है, किंतु वास्तविक सशक्तिकरण के लिए उचित पारिश्रमिक, सुरक्षित कार्य वातावरण, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता आवश्यक है। घरेलू श्रमिक महिलाओं को सम्मानजनक श्रमिक के रूप में स्वीकार करना उनके सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
Keywords
असंगठित क्षेत्र; घरेलू श्रमिक महिलाएँ; सामाजिक स्थिति; महिला सशक्तिकरण; आर्थिक स्वतंत्रता; अजमेर जिला; सामाजिक परिवर्तन।