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IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1052-1056

उच्च शिक्षा में आदिवासियों की भागीदारी-झारखंड के विशेष संदर्भ में

Author Name: माया कुमारी;   डॉ. शारदा कुमारी;  

1. शोधार्थी, समाजशास्त्र विभाग, वाई.बी.एन यूनिवर्सिटी, रांची, झारखंड, भारत

2. शोध निर्देशिका, सहायक प्राध्यापक, वाई.बी.एन यूनिवर्सिटी, रांची झारखंड, भारत

Abstract

उच्च शिक्षा किसी भी समाज के बौद्धिक, सामाजिक एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। झारखंड के विशेष संदर्भ में आदिवासी समाज की उच्च शिक्षा में भागीदारी का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। संवैधानिक प्रावधानों, आरक्षण नीति, छात्रवृत्ति योजनाओं, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों, जनजातीय छात्रावासों तथा राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न शैक्षिक योजनाओं के परिणामस्वरूप जनजातीय विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा तक पहुँच में वृद्धि हुई है। वर्तमान समय में आदिवासी छात्र-छात्राएँ कला, विज्ञान, वाणिज्य, चिकित्सा, अभियंत्रण, कृषि, प्रबंधन, विधि तथा शोध जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

इसके बावजूद उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी अभी भी अनेक चुनौतियों से प्रभावित है। आर्थिक अभाव, भौगोलिक दुर्गमता, गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा का अभाव, भाषाई कठिनाइयाँ, डिजिटल संसाधनों की सीमित उपलब्धता, छात्रावासों की कमी तथा पारिवारिक सामाजिक परिस्थितियाँ उच्च शिक्षा तक पहुँच में प्रमुख बाधाएँ हैं। विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रतिस्पर्धी वातावरण के अनुरूप स्वयं को स्थापित करने के लिए अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ता है। जनजातीय छात्राओं के संदर्भ में सुरक्षा, आवासीय सुविधाएँ तथा सामाजिक जागरूकता जैसे आयाम भी महत्वपूर्ण हैं।

अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि उच्च शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज में सामाजिक चेतना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम भी है। शिक्षित युवा अपने समुदाय में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक विकास के प्रेरक बनकर उभर रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तार किया जाए, छात्रवृत्ति योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाए, डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ किया जाए, स्थानीय भाषाओं एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अनुरूप शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए तथा गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी उच्च शिक्षा सुनिश्चित की जाए। इससे झारखंड के आदिवासी समाज का समग्र विकास अधिक सुदृढ़ एवं सतत रूप से संभव हो सकेगा।

Keywords

आदिवासी शिक्षा, उच्च शिक्षा, जनजातीय समाज, झारखंड, शैक्षिक विकास, सामाजिक परिवर्तन, छात्रवृत्ति, समावेशी शिक्षा, शैक्षिक अवसर, महिला शिक्षा, जनजातीय सशक्तिकरण, शिक्षा का अधिकार, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, शैक्षिक समानता, कौशल विकास, उच्च शिक्षण संस्थान, शैक्षिक अवसंरचना, सामाजिक न्याय, मानव संसाधन विकास, सतत विकास।