International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(3):1143-1145
भारत में ई-कोर्ट्स और न्याय तक पहुँच संवैधानिक और वैधानिक ढाँचे के अंतर्गत न्यायपालिका के डिजिटल रूपांतरण का मूल्यांकन
Author Name: धीरज प्रजापति; श्री हरिशंकर कोरी;
Abstract
इक्कीसवीं सदी को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की सदी कहा जाता है। डिजिटल तकनीक ने शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार तथा न्याय प्रशासन सहित समाज के प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किया है। भारतीय न्यायपालिका, जो लंबे समय से लंबित मामलों, न्यायिक विलंब, प्रक्रियागत जटिलताओं तथा न्याय तक सीमित पहुँच जैसी समस्याओं का सामना कर रही थी, ने भी डिजिटल परिवर्तन को अपनाते हुए ई-कोर्ट्स प्रणाली का विकास किया है। ई-कोर्ट्स परियोजना का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, न्यायालयों की कार्यकुशलता बढ़ाना तथा नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत प्रारंभ की गई ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना ने न्यायालयों में ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रबंधन तथा वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाओं का विकास किया। ब्व्टप्क्-19 महामारी के दौरान इन तकनीकी व्यवस्थाओं ने न्यायिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह शोध लेख ई-कोर्ट्स प्रणाली के विकास, संवैधानिक आधार, वैधानिक संरचना तथा न्याय तक पहुँच पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 एवं 39।, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा नवीन डिजिटल डेटा संरक्षण व्यवस्था का परीक्षण किया गया है। शोध में यह पाया गया कि ई-कोर्ट्स प्रणाली ने न्यायिक पारदर्शिता, दक्षता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ाया है, किंतु डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता तथा तकनीकी अवसंरचना की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं।
अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि यदि न्यायपालिका को मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र, उन्नत तकनीकी अवसंरचना तथा व्यापक डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों से सशक्त किया जाए, तो ई-कोर्ट्स प्रणाली भारतीय न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, पारदर्शी एवं प्रभावी बना सकती है।
Keywords
ई-कोर्ट्स, न्याय तक पहुँच, डिजिटल न्यायपालिका, वर्चुअल कोर्ट, ई-फाइलिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, न्यायिक सुधार, डिजिटल शासन।