International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(2):62-67
किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर साइबर नैतिकता के पतन का प्रभाव और मार्गदर्शन एवं परामर्श की मध्यस्थ भूमिका
Author Name: सर्वेश तिवारी; डॉ. सपना जोशी;
Abstract
डिजिटल प्रौद्योगिकी के तीव्र विस्तार ने किशोरों के सामाजिक, शैक्षिक एवं भावनात्मक जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। यद्यपि ऑनलाइन माध्यमों ने ज्ञान, संप्रेषण और आत्म-अभिव्यक्ति के नए अवसर प्रदान किए हैं, तथापि साइबर नैतिकता में निरंतर गिरावट किशोर मानसिक स्वास्थ्य और साइबर व्यवहार के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही है। डिजिटल मंचों पर अपमानजनक टिप्पणियाँ, निजी सूचनाओं का सार्वजनिक प्रसारण तथा आभासी बहिष्कार जैसी घटनाएँ किशोरों की आत्म-छवि और भावनात्मक संतुलन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं (Smith et al., 2008), जिसके परिणामस्वरूप उनमें चिंता, अवसाद, आत्मसम्मान में कमी तथा सामाजिक अलगाव की प्रवृत्तियाँ विकसित हो सकती हैं।
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य साइबर नैतिकता के क्षरण का किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य एवं साइबर व्यवहार पर प्रभाव का विश्लेषण करना तथा विद्यालय-आधारित मार्गदर्शन एवं परामर्श की मध्यस्थ (mediating) एवं संरक्षक भूमिका का परीक्षण करना है। यह अध्ययन गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक अनुसंधान दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें साइबर मनोविज्ञान, डिजिटल नैतिकता तथा विद्यालयीय परामर्श से संबंधित समकालीन साहित्य का व्यवस्थित अवलोकन एवं विषयगत विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष संकेत करते हैं कि अनैतिक साइबर व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य के मध्य एक द्विदिशात्मक संबंध विद्यमान है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि यदि मार्गदर्शन एवं परामर्श को डिजिटल साक्षरता एवं मूल्य-आधारित शिक्षा के साथ समन्वित रूप में लागू किया जाए, तो नकारात्मक साइबर अनुभवों को नियंत्रित कर उत्तरदायी डिजिटल नागरिकता को प्रोत्साहित किया जा सकता है। यह शोध डिजिटल युग की चुनौतियों के समाधान हेतु एक समग्र शैक्षिक हस्तक्षेप मॉडल की आवश्यकता पर बल देता है।
Keywords
किशोर मानसिक स्वास्थ्य, साइबर नैतिकता, साइबर व्यवहार, मार्गदर्शन एवं परामर्श, डिजिटल नागरिकता