International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2025;4(4):748-751
हिन्द प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियां एवं समाधान : एक विश्लेषण
Author Name: डॉ. संजय गौतम;
Abstract
हिन्द एवं प्रशांत महासागर एक.दूसरे से रणनीतिक रूप से निकटता से जुड़े हैंएभौगोलिक तौर पर हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर समुद्र का जो हिस्सा बनता है उसे हिंद.प्रशांत क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। हिंद प्रशांत एक ऐसा केंद्रीय भौगोलिक क्षेत्र है जो कई तरह से वैश्विक एजेंडा तय करता रहा है। इस विविधता भरे ऊर्जावान मगर जटिल क्षेत्र में भू.राजनीतिक तनावए सुरक्षा संबंधी चुनौतियांएआर्थिक आयाम और पर्यावरण की चिंताएं आपस में मिलती रहीं हैं।हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती चीन की उपस्थिति है।चीन अपने ष्वन बेल्ट वन रोडष् पहल के माध्यम से विश्व की महाशक्ति के रूप में अपने को बदलने के लिये दुनिया के विभिन्न देशों में इंफ़्रास्ट्रक्चर तथा कनेक्टिविटी पर भारी निवेश कर रहा है। उसकी इस पहल का उद्देश्य हिंद.प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करना भी है। चीन अपनी काल्पनिक नीति स्ट्रिंग ऑफ पर्ल के ज़रिये भारत को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। हिंद.प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को इस क्षेत्र के देशों द्वारा महत्वपूर्ण माना जाता है। यूरोपीय संघए फ्रांसए जापानए यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका की हिंद.प्रशांत रणनीतियां सभी शांतिपूर्ण हिंद.प्रशांत के विकास को सुनिश्चित करने में भारत के साथ जुड़ने की आवश्यकता पर जोर देती हैं।भारत के साथ जुड़ने औरष्स्वतंत्रएखुले समावेशीष् इंडो.पैसिफिक के बाद के दृष्टिकोण का समर्थन करने के इच्छुक हैं। साथ में उन्हें एक इंडो.पैसिफिक आर्किटेक्चर का निर्माण करना होगा जो उभरती चुनौतियों का जवाब देने और क्षेत्र के देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा करने में सक्षम हो।
Keywords
हिंद-प्रशांत क्षेत्र, समुद्री सुरक्षा, चीन की रणनीति, बहुध्रुवीयता, क्षेत्रीय सहयोग