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IJCRM
International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary
ISSN: 2583-7397
Open Access • Peer Reviewed
Impact Factor: 5.67

International Journal of Contemporary Research In Multidisciplinary, 2026;5(1):218-224

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण पद्धतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण

Author Name: Dr. Sharwan Kumar;  

1. Lecturer, District Institute of Education and Training (DIET), Pirouta, Bhojpur, Bihar Education Service (B.E.S.)

Abstract

यह शोध पत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP 2020) के परिप्रेक्ष्य में बिहार की उच्च शिक्षा प्रणाली में प्रचलित शिक्षण पद्धतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत में उच्च शिक्षा वर्तमान समय में परिवर्तनशील दौर से गुजर रही है, जबकि बिहार अभी भी सीमित संसाधन, शिक्षक-प्रधान और व्याख्यान-आधारित शिक्षण मॉडल पर अत्यधिक निर्भर है। पारंपरिक पद्धतियों के कारण छात्रों में आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता, रचनात्मकता और व्यावहारिक अनुभव का विकास बाधित होता राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP 2020) अनुभवात्मक, बहु-विषयी और छात्र-केंद्रित शिक्षण दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, जो आधुनिक वैश्विक अपेक्षाओं के अनुरूप है। किंतु बिहार में इस नए प्रतिमान के कार्यान्वयन में संरचनात्मक कमियाँ (जैसे अवसंरचना की कमी, डिजिटल असमानता, शिक्षक छात्र अनुपात में कमी), नीतिगत चुनौतियाँ तथा संस्थागत जड़ता प्रमुख बाधाएँ बनती हैं। सैद्धांतिक ढाँचों—निर्माणवाद, आलोचनात्मक शिक्षाशास्त्र और ब्लूम के संशोधित वर्गीकरण—के आधार पर विश्लेषण दिखाता है कि बिहार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP 2020)  के शिक्षण मॉडल की व्यवहार्यता कई सामाजिक–आर्थिक और प्रशासनिक बाधाओं से प्रभावित होती है। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि बिहार की उच्च शिक्षा प्रणाली में प्रभावी सुधार तभी संभव है जब शिक्षण पद्धतियों में मूलभूत परिवर्तन, शिक्षक क्षमता-विकास, डिजिटल अवसंरचना विस्तार और सामाजिक न्याय आधारित नीतियों को प्राथमिकता दी जाए।

Keywords

राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP 2020), बिहार उच्च शिक्षा, शिक्षण पद्धतियाँ, निर्माणवाद, आलोचनात्मक शिक्षाशास्त्र, छात्र-केंद्रित अधिगम, डिजिटल असमानता और बहु-विषयी शिक्षा